नात लिरिक्स

Sochta Hoon Main Wo Ghadi Kya Ajab Ghadi Hogi | Sochta Hoon Main Wo Ghari Kya Ajab Ghari Hogi

सोचता हूँ मैं वो घड़ी क्या अजब घड़ी होगी

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सोचता हूँ मैं वो घड़ी, क्या अजब घड़ी होगीजब दर-ए-नबी पर हम सब की हाज़री होगी

आरज़ू है सीने में, घर बने मदीने मेंहो करम जो बंदे पर, बंदा-परवरी होगी

किब्रिया के जल्वों से क्या समाँ बँधा होगामहफ़िल-ए-नबी जिस दम 'अर्श पर सजी होगी

बात क्या है ! बाद-ए-सबा इतनी क्यूँ मु'अत्तर हैसब्ज़-सब्ज़ गुंबद को चूम कर चली होगी

सौ खुलेंगे उस के लिए रहमतों के दरवाज़ेना'त-ए-मुस्तफ़ा जिस ने एक भी सुनी होगी

एक ही निशानी है मुस्तफ़ा के मय-कश कीमुस्तफ़ा के मय-कश की आँख मध-भरी होगी

नाम-ए-मुस्तफ़ा की क़सम, पुर-सुकूँ हूँ मैं अब तकतुम भी नाम लो उन का, घर में शांती होगी

देख तो, नियाज़ी ! ज़रा, सो गया क्या दीवानाउन की याद में शायद आँख लग गई होगी

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