नात लिरिक्स

Shor Barpa Hai Jahan Mein Amad-e-Sarkar Hai

शोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरी (उबैद रज़ा)उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गली-गली नगर-नगरधूम तो देखो शाह के मीलाद की

शैख़ैन के आक़ा ! मरहबा !ख़तनैन के मौला ! मरहबा !ज़हरा के बाबा ! मरहबा !हसनैन के नाना ! मरहबा !

शोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार हैशोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

क्यूँ जहाँ मसरूर है, मा'मूर है, सरशार हैकिस लिए चारों तरफ़ ये बारिश-ए-अनवार हैकिस लिए सारी ज़मीं तस्वीर-ए-लालाज़ार हैशोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

क्यूँ ज़माने की ज़बाँ पर है तराना नूर काकिस लिए हर हर मकाँ है जल्वा-ख़ाना नूर काक्यूँ फ़ज़ा में आज भीनी-भीनी सी महकार है

शैख़ैन के आक़ा ! मरहबा !ख़तनैन के मौला ! मरहबा !ज़हरा के बाबा ! मरहबा !हसनैन के नाना ! मरहबा !

शोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

वज्द में है आज का'बा भी ख़ुशी से देखिएगिर गए हैं क़स्र-ए-किसरा के भी कुंगरे देखिएआमिना के घर में आया वो शह-ए-अबरार हैशोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

क़ुम-क़ुमों की ये क़ितारें आफ़रीं सद-आफ़रींसब्ज़ परचम की बहारें आफ़रीं सद-आफ़रींचार जानिब मरहबा की गूँज है तकरार है

शैख़ैन के आक़ा ! मरहबा !ख़तनैन के मौला ! मरहबा !ज़हरा के बाबा ! मरहबा !हसनैन के नाना ! मरहबा !

शोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

वज्द में हैं 'आशिक़-ए-मीलाद सारे चार-सूलग रहे हैं मरहबा के आज ना'रे चार-सूआज 'आलम बन गया पर्द-ए-बनु-नज्जार हैशोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

हम विलादत की ख़ुशी ऐसे मनाएँगे, 'उबैद !क़ुम-क़ुमों से परचमों से घर सजाएँगे, 'उबैद !शादमानी का हमारी क्या हसीं इज़हार है

शैख़ैन के आक़ा ! मरहबा !ख़तनैन के मौला ! मरहबा !ज़हरा के बाबा ! मरहबा !हसनैन के नाना ! मरहबा !

शोर बरपा है जहाँ में आमद-ए-सरकार है

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