नात लिरिक्स

Sher-e-Khuda Ke Sher Ka Tewar Nahin Jhuka

शेर-ए-ख़ुदा के शेर का तेवर नहीं झुका

नात ख़्वान: ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ालीशायर: अज़हर फ़ारूक़ी बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शेर-ए-ख़ुदा के शेर का तेवर नहीं झुकाया'नी कहीं से नाम-ए-बहत्तर नहीं झुका

ताक़त लगा दी पूरी की पूरी यज़ीद नेलेकिन मेरे हुसैन का इक सर नहीं झुका

ऐ शिम्र ! तू हुसैन को कैसे झुकाएगातुझ से तो एक छोटा सा असग़र नहीं झुका

आक़ा ने फिर कहा कि 'अली को बुलाइएआख़िर किसी से जब दर-ए-ख़ैबर नहीं झुका

दामन मिला है जब से मुझे अहल-ए-बैत काउस रोज़ से कभी कहीं अज़हर नहीं झुका

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