नात लिरिक्स

Mujh Gunahgar Ko Daman Mein Chhupa Lo Aaqa

मुझ गुनहगार को दामन में छुपा लो आक़ा

नात ख़्वान: ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ालीशायर: ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझ गुनहगार को दामन में छुपा लो, आक़ा !टूट कर मैं न बिखर जाऊँ सँभालो, आक़ा !

जिन पे जिब्रील-ए-अमीं सर को झुकाने आएवो जो पत्थर का जिगर मोम बनाने आएहै तमन्ना, उन्हीं क़दमों से लगा लो, आक़ा !टूट कर मैं न बिखर जाऊँ सँभालो, आक़ा !

यक-ब-यक सामने आते वो नज़र आने लगेदेखते देखते इमदाद वो फ़रमाने लगेजूँही हिरनी ने पुकारा है बचा लो, आक़ा !टूट कर मैं न बिखर जाऊँ सँभालो, आक़ा !

रूठ जाए न कहीं हम से ख़ुदा की रहमतआप से दूर न हो जाए कहीं ये उम्मतअपनी सुन्नत के हर अंदाज़ में ढालो, आक़ा !टूट कर मैं न बिखर जाऊँ सँभालो, आक़ा !

शहर-ए-तयबा की बहारों को नज़र में भर लूँख़ुद को दीवाना मदीने की गली का कर लूँअपनी चौखट पे ग़ज़ाली को बुला लो, आक़ा !टूट कर मैं न बिखर जाऊँ सँभालो, आक़ा !

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