नात लिरिक्स

Arsh Ka Arsh-e-Mualla Aap Hain | Mustafa-e-Zaat-e-Yakta Aap Hain With Tazmeen

अर्श का अर्श-ए-मुअल्ला आप हैं | मुस्तफ़ा-ए-ज़ात-ए-यकता आप हैं तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अर्श का 'अर्श-ए-मु'अल्ला आप हैंऔर का'बे का भी का'बा आप हैंया'नी क़िब्ले का भी क़िब्ला आप हैंमुस्तफ़ा-ए-ज़ात-ए-यकता आप हैंयक ने जिस को यक बनाया, आप हैं

एक दिन कहने लगे रूह-उल-अमींया नबी ! या रहमत-अल-लिल-'आलमीं !चाहे हो जाए कोई कितना हसींआप जैसा कोई हो सकता नहींअपनी हर ख़ूबी में तन्हा आप हैं

झिलमिलाती, चमचमाती कहकशाँचाँद सूरज नीला नीला आसमाँऔर जो कुछ भी ज़मीं पर है यहाँआप की ख़ातिर बनाए दो जहाँअपनी ख़ातिर जो बनाया, आप हैं

आप के बारे में सोचा, जान दीआप के रौज़े पे पहुँचा, जान दीगुंबद-ओ-जाली पे, आक़ा ! जान दीआप की तल'अत को देखा, जान दीक़ब्र में पहुँचा तो देखा आप हैं

दर्द में, तक़लीफ़ में है बाल बालआप पर रौशन है मेरा सारा हालअज़हर-ए-'आसी को भी, आक़ा ! सँभालबर दरत आमद गदा बहर-ए-सुवालहो भला अख़्तर का, दाता आप हैं

कलाम:अख़्तर रज़ा ख़ान

तज़मीन:-

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