नात लिरिक्स

Shayian Lillah Ya Abdul Qadir | Idhar Bhi Nigah-e-Karam Ghous-e-Azam

शैअन-लिल्लाह या अब्दुल क़ादिर | इधर भी निगाह-ए-करम ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

इधर भी निगाह-ए-करम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !करो दूर रंज-ओ-अलम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

मेरा हर मरज़ दूर हो जाए, प्यारे !करो ऐसा आ कर के दम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

बहुत चुभ रहा है, ख़ुदा-रा निकालोमेरे दिल से तीर-ए-अलम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

कहीं गिर न जाऊँ, ख़ुदा-रा सँभालोमेरे डगमगाए क़दम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

तेरा हूँ मैं तेरा, मेरे इस कहे कासर-ए-हश्र रखना भरम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

खिलाता पिलाता है रब्ब-ए-दो-'आलमतुझे दे के अपनी क़सम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

मदीने से नज्दी बला को निकालोकरो उन के सर को क़लम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

मुझे ख़्वाब में आ के जल्वा दिखा दोकरो आज की शब करम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

जिला पाएगा दिल 'उबैद-ए-रज़ा काज़रा रख दो अपना क़दम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

ये दिल ये जिगर है, ये आँखें ये सर हैजहाँ चाहो रक्खो क़दम, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

घिरा है बलाओं में बंदा तुम्हारामदद के लिए आओ, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

तेरे हाथ में हाथ मैं ने दिया हैतेरे हाथ है लाज, या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

भँवर में फँसा है सफ़ीना हमाराबचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

निकाला है पहले तो डूबे हुओं कोऔर अब डूबतों को बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

क़सम है कि मुश्किल को मुश्किल न पायाकहा हम ने जिस वक़्त या ग़ौस-ए-आ'ज़म

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

कहे किस से जा कर हसन अपने दिल कीसुने कौन तेरे सिवा, ग़ौस-ए-आज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

खिला मेरे दिल की कली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !मिटा क़ल्ब की बे-कली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

मेरे चाँद ! मैं सदक़े, आजा इधर भीचमक उट्ठे दिल की गली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

तेरे रब ने मालिक किया तेरे जद कोतेरे घर से दुनिया पली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

कहा जिस ने 'या ग़ौस अग़िसनी' तो दम मेंहर आई मुसीबत टली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

नहीं कोई भी ऐसा फ़रियादी, आक़ा !ख़बर जिस की तुम ने न ली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

क़दम गर्दन-ए-औलिया पर है तेरातू है रब का ऐसा वली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

मेरी रोज़ी मुझ को 'अता कर दो, आक़ा !तेरे दर से दुनिया ने ली, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

फ़िदा तुम पे हो जाए नूरी-ए-मुज़्तरये है इस की ख़्वाहिश-दिली, ग़ौसे-आ'ज़म !

शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर !या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !

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