नात लिरिक्स

Shehr-e-Nabi Teri Galiyon Ka Naqsha Hi Kuchh Aisa Hai

शहर-ए-नबी तेरी गलियों का नक़्शा ही कुछ ऐसा है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद मुहम्मद मदनी मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शहर-ए-नबी ! तेरी गलियों का नक़्शा ही कुछ ऐसा हैख़ुल्द भी है मुश्ताक़-ए-ज़ियारत, जल्वा ही कुछ ऐसा है

दिल को सुकूँ दे, आँख को ठंडक, रौज़ा ही कुछ ऐसा हैफ़र्श-ए-ज़मीं पर 'अर्श-ए-बरीं हो, लगता ही कुछ ऐसा है

उन के दर पर ऐसा झुका दिल, उठने का अब होश नहींअहल-ए-शरी'अत हैं सकते में, सज्दा ही कुछ ऐसा है

'अर्श-ए-मु'अल्ला सर पे उठाए, ताइर-ए-सिदरा आँख लगाएपत्थर भी क़िस्मत चमकाए, तल्वा ही कुछ ऐसा है

सिब्त-ए-नबी है पुश्त-ए-नबी पर और सज्दे की हालत हैआक़ा ने तस्बीह बढ़ा दी, बेटा ही कुछ ऐसा है

रब के सिवा देखा न किसी ने, फ़र्शी हों या 'अर्शी होंउन की हक़ीक़त के चेहरे पर पर्दा ही कुछ ऐसा है

ताज को अपने कासा बना कर हाज़िर हैं शाहान-ए-जहाँउन की 'अता ही कुछ ऐसी है, सदक़ा ही कुछ ऐसा है

ख़म हैं यहाँ जमशेद-ओ-सिकंदर, इस में क्या हैरानी है ?उन के ग़ुलामों का, ऐ अख़्तर ! रुत्बा ही कुछ ऐसा है

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