नात लिरिक्स

Shab Ki Aahen Na Gain Subh Ke Naale Na Gaye

शब की आहें न गईं सुब्ह के नाले न गए

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शब की आहें न गईं, सुब्ह के नाले न गएउन की यादों से परे उन के जियाले न गए

सब्ज़ गुंबद पे नज़र पड़ते ही वो हाल हुआअपने जज़्बात किसी तरह सँभाले न गए

ऐसी दिल-जूई ज़माने में कहीं देखी है ?उन से मुझ जैसे गुनहगार भी टाले न गए

इक तुम्ही हो कि निभाते हो हमेशा हम कोवर्ना हम जैसे किसी और से पाले न गए

रह गई लाज मेरी उन के सबब महशर मेंलिल्लाहिल-हम्द मेरे 'ऐब खँगाले न गए

उन के रस्ते में वो हालत हो कि दुनिया देखेज़िंदगी जाती रही, पाँव के छाले न गए

वाह क्या शान है आक़ा की ! कि कहते हैं सभीचाहे दो ज़ख़्म उन्हें, चाहने वाले न गए

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