नात लिरिक्स

Shab-e-Furqat Hai Dil Mein Iztirab Aaya To Kya Hoga

शब-ए-फ़ुर्क़त है दिल में इज़्तिराब आया तो क्या होगा

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शब-ए-फ़ुर्क़त है दिल में इज़्तिराब आया तो क्या होगाजो इस ज़ुल्मत से मिलने आफ़ताब आया तो क्या होगा

लिखे हैं ख़त जो आक़ा को पशेमानी के अश्कों सेकिसी दिन उस मेहरबाँ का जवाब आया तो क्या होगा

सदा जिस नाज़नीं पैकर को सोचा ही किया मैं नेकभी जो ख़्वाब में वो बे-हिजाब आया तो क्या होगा

मैं सहरा-ए-'अतश में क़ैस की मानिंद जो भटकूँअगर सर-चश्मा-ए-हक़ का लु'आब आया तो क्या होगा

ख़यालों में जो मक्के की ज़फ़र-याबी चली आईअचानक बुत-कदे में इंक़िलाब आया तो क्या होगा

मु'अत्तर करने क़िस्मत से दर-ओ-बाम-ए-दिल-ओ-जाँ कोमेरी ख़ातिर मदीने का गुलाब आया तो क्या होगा

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