नात लिरिक्स

Shab-e-Furqat Dhale Bar Aaye Arman Ya Rasoolallah | Tanam Farsooda Jaan Para With Tazmeen

शब-ए-फ़ुर्क़त ढले बर आए अरमाँ या रसूलल्लाह | तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: अल्लामा हसन मयारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बुला लो अपने दर पर अब तो हम ख़ाना-बदोशों कोफिरें कब तक ज़लील-ओ-ख़्वार दर दर बे-ठिकाने से

शब-ए-फ़ुर्क़त ढले बर आए अरमाँ, या रसूलल्लाह !करो तुम आस्ताँ का अपने मेहमाँ, या रसूलल्लाह !बुला लो अब तो क़दमों में, मेरी जाँ या रसूलल्लाह !तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !दिलम पज़मुर्दा आवारा ज़े-'इस्याँ, या रसूलल्लाह !

तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !

तुम्हारी याद का ग़लबा हमेशा दिल पे हो तारीलगा दो 'इश्क़ की अपने ख़ुदा-रा ऐसी चिंगारीइसी ख़्वाहिश में कट जाए मेरी 'उम्र-ए-रवाँ सारीचूँ सू-ए-मन गुज़र आरी, मन-ए-मिस्कीं ज़े-नादारीफ़िदा-ए-नक़्श-ए-ना'लैनत कुनम जाँ, या रसूलल्लाह !

तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !दिलम पज़मुर्दा आवारा ज़े-'इस्याँ, या रसूलल्लाह !

तुम्हारी ना'त से ही है करम का सिलसिला पैहमहै ख़्वाहिश वक़्त-ए-आख़िर जब निकलने वाला हो ये दमज़बाँ पर जारी हो नग़्मा तेरा, दिल ये कहे उस दमज़े-जाम-ए-हुब्ब-ए-तू मस्तम, ब-ज़ंजीर-ए-तू दिल बस्तमनमी-गोयम कि मन हस्तम सुख़न-दाँ, या रसूलल्लाह !

तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !दिलम पज़मुर्दा आवारा ज़े-'इस्याँ, या रसूलल्लाह !

सियाही दफ़्तर-ए-आ'माल की होती नहीं है कम'अज़ाब-ए-क़ब्र-ओ-महशर का मुझे अब खा रहा है ग़मशरमसारी गुनाहों पर है और आँखें हैं मेरी नमज़े-कर्दा ख़्वेश हैरानम, सियह शुद रू ज़े-'इस्यानमपशेमानम पशेमानम पशेमाँ, या रसूलल्लाह !

तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !दिलम पज़मुर्दा आवारा ज़े-'इस्याँ, या रसूलल्लाह !

सर-ए-महशर महामिद पेश हो जो दर सियाह-काराँकहे बे-साख़्ता जो देखे रहमत बर ख़ता-काराँमेरी उम्मीद हो तुम, ऐ शिफ़ा-ए-दर्द-ए-बीमाराँ !चूँ बाज़ू-ए-शफ़ा'अत रा कुशाई बर गुनह-गाराँम-कुन महरूम जामी रा दरा आँ, या रसूलल्लाह !

तनम-फ़र्सूदा जाँ-पारा ज़े-हिज्राँ, या रसूलल्लाह !दिलम पज़मुर्दा आवारा ज़े-'इस्याँ, या रसूलल्लाह !

कलाम:मौलाना अब्दुर्रहमान जामी

तज़मीन:-

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