नात लिरिक्स

Sarwar Kahoon Ke Malik-o-Maula Kahoon Tujhe

सरवर कहूँ कि मालिक-ओ-मौला कहूँ तुझे

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सरवर कहूँ कि मालिक-ओ-मौला कहूँ तुझेबाग़-ए-ख़लील का गुल-ए-ज़ेबा कहूँ तुझे

हिरमाँ-नसीब हूँ, तुझे उम्मीद-गह कहूँजान-ए-मुराद-ओ-कान-ए-तमन्ना कहूँ तुझे

गुलज़ार-ए-क़ुद्स का गुल-ए-रंगीं-अदा कहूँदरमान-ए-दर्द-ए-बुलबुल-ए-शैदा कहूँ तुझे

सुब्ह-ए-वतन पे शाम-ए-ग़रीबाँ को दूँ शरफ़बेकस-नवाज़ गेसूओं वाला कहूँ तुझे

अल्लाह रे ! तेरे जिस्म-ए-मुनव्वर की ताबिशेंऐ जान-ए-जाँ ! मैं जान-ए-तजल्ला कहूँ तुझे

बे-दाग़-लाला या क़मर-ए-बे-कलफ़ कहूँबे-ख़ार गुलबुन-ए-चमन-आरा कहूँ तुझे

मुजरिम हूँ अपने 'अफ़्व का सामाँ करूँ, शहा !या'नी शफ़ी'अ रोज़-ए-जज़ा का कहूँ तुझे

इस मुर्दा-दिल को मुज़्दा हयात-ए-अबद का दूँताब-ओ-तवान-ए-जान-ए-मसीहा कहूँ तुझे

तेरे तो वस्फ़ 'ऐ़ब-ए-तनाही से हैं बरीहैराँ हूँ, मेरे शाह ! मैं क्या क्या कहूँ तुझे

कह लेगी सब कुछ उन के सना-ख़्वाँ की ख़ामुशीचुप हो रहा है कह के, "मैं क्या क्या कहूँ तुझे !"

लेकिन रज़ा ने ख़त्म सुख़न इस पे कर दियाख़ालिक़ का बंदा, ख़ल्क़ का आक़ा कहूँ तुझे

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