नात लिरिक्स

Sare Aalam Pe Wo Ehsan Kiye Baithe Hain

सारे आलम पे वो एहसान किए बैठे हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सारे 'आलम पे वो एहसान किए बैठे हैंजो हैं मुफ़्लिस उन्हें सुल्तान किए बैठे हैं

मो'जिज़ा देख के बू-जहल ने घबरा के कहाये तो कंकर को मुसलमान किए बैठे हैं

नाम लेते हैं फ़रिश्ते भी अदब से उन काकाम वो हज़रत-ए-हस्सान किए बैठे हैं

आप पर हज़रत-ए-अय्यूब मैं सदक़े जाऊँआप तो आक़ा को मेहमान किए बैठे हैं

चोरी करने के लिए चोर जो आया उस कोइक वली सय्यिद-ए-जीलान किए बैठे हैं

हज़रत-ए-ख़्वाजा मु'ईं को मेरे आक़ा मौलापूरे भारत का निगहबान किए बैठे हैं

जब दर-ए-ख़्वाजा पे हाज़िर हुआ जोगी जयपालउस को भी साहिब-ए-ईमान किए बैठे हैं

अना सागर को कटोरे में बुला कर ख़्वाजापृथ्वीराज को हैरान किए बैठे हैं

मशवरा मेरा यही है वो किछौछा जाएँजिन को जिन्नात परेशान किए बैठे हैं

सैकड़ों मुफ़्ती नहीं कर सके मिल कर अब तकजो बरेली के रज़ा ख़ान किए बैठे हैं

सुल्ह-ए-कुल्ली से त'अल्लुक़ नहीं रक्खें सुन्नीफ़ख़्र-ए-अज़हर यही ए'लान किए बैठे हैं

क़ब्र की मिट्टी उन्हें खा नहीं सकती, गौहर !दिल में महफ़ूज़ जो क़ुरआन किए बैठे हैं

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