नात लिरिक्स

Sare Aalam Mein Mohabbat Ki Ghata Chhai Hai

सारे आलम में मोहब्बत की घटा छाई है

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीशायर: बेदम शाह वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सारे 'आलम में मोहब्बत की घटा छाई हैआप आए तो ज़माने में बहार आई है

रूह जब वादी-ए-पुरदर्द में घबराई हैउम्मती-उम्मती आक़ा की सदा आई है

बन के ख़ुश्बू जो मेरे दिल में उतर आई हैवो तेरी याद है, अब रूह समझ पाई है

आँख के तिल में है महफ़ूज़ जमाल-ए-ख़ज़राजैसे जन्नत मेरी नज़रों में सिमट आई है

ज़ात-ए-सरकार है नूरानी सहीफ़ों की दलीलया'नी क़ुरआन से पहले ये किताब आई है

हर जगह मेरे लिए सब ने बिछाईं आँखेंहर जगह तेरी ही निस्बत मेरे काम आई है

कोई मुश्किल हो, कोई ग़म हो, करो ज़िक्र-ए-हबीबये दवा वो है जो हर दौर में काम आई है

मरने वाले की खुली आँख खुली रहने दोवो नज़र जल्वा-ए-आक़ा की तमन्नाई है

जब तबीयत ग़म-ए-तन्हाई से घबराई हैहम तेरे साथ हैं, ये उन की सदा आई है

सारी दुनिया की निगाहों से गिरा है बेदमतब कहीं जा के तेरे दिल में जगह पाई है

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