नात लिरिक्स

Adam Se Layi Hai Hasti Mein Aarzoo-e-Rasool

अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल

नात ख़्वान: फ़रीद अयाज़शायर: बेदम शाह वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूलकहाँ-कहाँ लिए फिरती है जुस्तजू-ए-रसूल

ख़ुशा वो दिल कि हो जिस दिल में आरज़ू-ए-रसूलख़ुशा वो आँख जो हो मह्व-ए-हुस्न-ए-रू-ए-रसूल

तलाश-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-मुस्तफ़ा की क़समचुने हैं आँखों से ज़र्रात-ए-ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल

फिर उन के नश्शा-ए-'इरफ़ाँ का पूछना क्या हैजो पी चुके हैं अज़ल में मय-ए-सुबू-ए-रसूल

बलाएँ लूँ तेरी, ऐ जज़्ब-ए-शौक़-ए-सल्ले-'अलाकि आज दामन-ए-दिल खिच रहा है सू-ए-रसूल

शगुफ़्ता गुलशन-ए-ज़हरा का हर गुल-ए-तर हैकिसी में रंग-ए-'अली और किसी में बू-ए-रसूल

इलाही ! हश्र के दिन इस लिबास में उट्ठूँमली हुई हो मेरे तन से ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल

'अजब तमाशा हो मैदान-ए-हश्र में, बेदम !कि सब हों पेश-ए-ख़ुदा और मैं रू-ब-रू-ए-रसूल

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।