नात लिरिक्स

Samaa.n Aaj Har Samt Khushiyon Bhara Hai, Nazar Chaand Ramzaan Ka Aa Gaya Hai

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा है, नज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

नात ख़्वान: अश्फ़ाक़ अत्तारी और मेहमूद अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

ख़ुशा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया हैदर-ए-रहमत इक बार फिर वा हुवा है

ये क़ुरआन रमज़ाँ में नाज़िल हुवा हैइसी में शब-ए-क़द्र की भी 'अता है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

ख़ुदा के करम से खुले बाब-ए-रहमतहर इक बाब-ए-दोज़ख़ को ताला पड़ा है

मसर्रत के बादल उमँड कर के आएख़ुशी से दिल-ए-ग़मज़दा खिल उठा है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

जो सरकश शयातीन बाँधे गए हैंतो रमज़ाँ में शैताँ भी क़ैदी बना है

फ़ज़ाएँ मुनव्वर, समाँ कैफ़-आवरहर इक लम्हा रमज़ाँ का रौनक़ भरा है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

'इबादत में लज़्ज़त, तिलावत में रिक़्क़तजो है बख़्त बेदार वो पा रहा है

दीवानों को रोज़ों, नमाज़ों में लज़्ज़तदु'आओं में भी क्या मज़ा आ रहा है

जो है 'आशिक़-ए-सादिक़-ए-माह-ए-रमज़ाँवो जन्नत की जानिब बढ़ा जा रहा है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

सभी रोज़ादारों की, हर मो'तकिफ़ कीतू कर मग़्फ़िरत, इल्तिजा, या ख़ुदा ! है

मैं 'इश्क़-ए-मुहम्मद में रोया करूँ, काश !ख़ुदा ! तुझ से ये बहर-ए-रमज़ाँ दु'आ है

करूँ हर बरस हज, मदीना भी देखूँप-ए-माह-ए-रमज़ाँ, ख़ुदाया ! दु'आ है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

इलाही ! बना 'आशिक़-ए-माह-ए-रमज़ाँतुझे मदनी सरकार का वासिता है

ग़म-ए-माह-ए-रमज़ाँ से कर दे मुशर्रफ़तू 'अत्तार को, या ख़ुदा ! इल्तिजा है

समाँ आज हर सम्त ख़ुशियों भरा हैनज़र चाँद रमज़ान का आ गया है

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