नात लिरिक्स

Salle Ala Nabiyena Salle Ala Muhammadin | Dhoom Machi Hai Har Taraf Paida Hue Hain Mustafa

सल्ले-अला नबिय्येना सल्ले-अला मुहम्मदिन | धूम मची है हर तरफ़ पैदा हुए हैं मुस्तफ़ा

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना नज़ीर-उल-अकरम नईमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला हबीबेना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला शफ़ी'एना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

धूम मची है हर तरफ़, पैदा हुए हैं मुस्तफ़ासब की ज़ुबाँ पे है यही आज नसीब जाग उठाज़ुल्मत-ए-कुफ़्र मिट गई, नूर जहाँ पे छा गयाशान-ए-हुज़ूर देख कर कहने लगे मलाइका

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

वस्फ़-ए-हबीब-ए-किब्रिया कोई बयाँ करे तो क्या !ख़ुद ही ख़ुदा-ए-दो-जहाँ वासिफ़-ए-शान-ए-मुस्तफ़ाजान सका न आज तक कोई भी उन का मर्तबाजिस ने भी देखी इक झलक, कहने लगा यूँ बरमला

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

आप का रूप देख कर चाँद को चाँदनी मिलीफूलों को ज़ुल्फ़-ए-पाक के सदक़े में ताज़गी मिलीआप जो मुस्कुरा दिए, रात को रौशनी मिलीआप की जब नज़र उठी, दुनिया को ज़िंदगी मिली

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला हबीबेना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला शफ़ी'एना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

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