नात लिरिक्स

Sad-Shukr-e-Khuda Hai Ye Nisbat, Ham Dawat-e-Islami Waale

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: वसीम बेख़ुदउपलब्ध: हिंदी

शुक्रिया 'अत्तार का, शुक्रिया 'अत्तार काशुक्रिया 'अत्तार का, शुक्रिया 'अत्तार का

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

तहरीक ये सुन्नत वाली है, आक़ा की मोहब्बत वाली हैबस बाँटते रहते हैं उल्फ़त, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

ए रब के वली 'अत्तार पिया ! किस तरह तेरा हो शुक्र अदाकहते हैं सभी अहल-ए-सुन्नत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

हम आल-ए-नबी से प्यार करें, असहाब-ए-नबी की 'इज़्ज़त भीऔर दिल में रखें आ'ला हज़रत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

अल्लाह की रहमत से देखो, लो पूरे हुए चालीस बरससदियों में रहेंगे बा-निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

शुक्रिया 'अत्तार का, शुक्रिया 'अत्तार काशुक्रिया 'अत्तार का, शुक्रिया 'अत्तार का

मुश्ताक़ मिले, फ़ारूक़ मिले, वल्लाह ! हमें ज़मज़म भी मिलेफिर क्यूँ न कहें हम बा-इज़्ज़त, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

ज़ुल्फ़ें भी सजी हैं, 'अमामा भी, हुलिया भी मिला मदनी मदनीऔर रुख़ पे सजाते हैं सुन्नत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

इस मदनी चैनल के ज़रिए, घर घर में बहारें सुन्नत कीलूटेंगे सदा इस की बरकत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

हर हफ़्ते की शब में, ए यारो ! जब मदनी मुज़ाकरा चलता है'अत्तार की तकते हैं सूरत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

पहचान, ए बेख़ुद ! क्या पूछो, दुश्मन भी फ़िदा है जिस पर वोरखते हैं तबस्सुम की 'आदत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

सद-शुक्र-ए-ख़ुदा है, ये निस्बत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वालेनेकी की सदा देते दा'वत, हम दा'वत-ए-इस्लामी वाले

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