नात लिरिक्स

Sachchi Baat Sikhate Ye Hain

सच्ची बात सिखाते ये हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सच्ची बात सिखाते ये हैंसीधी राह दिखाते ये हैं

डूबी नावें तिराते ये हैंहिलती नावें जमाते ये हैं

टूटी आसें बँधाते ये हैंछूटी नब्ज़ें चलाते ये हैं

जलती जानें बुझाते ये हैंरोती आँखें हँसाते ये हैं

क़स्र-ए-दना तक किस की रसाईजाते ये हैं, आते ये हैं

उस के नाइब, इन के साहिबहक़ से ख़ल्क़ मिलाते ये हैं

शाफ़े' नाफ़े' राफ़े' दाफ़े'क्या क्या रहमत लाते ये हैं

शाफ़े'-ए-उम्मत नाफ़े'-ए-ख़ल्क़तराफ़े' रुत्बे बढ़ाते ये हैं

दाफ़े' या'नी हाफ़िज़-ओ-हामीदफ़'-ए-बला फ़रमाते ये हैं

फ़ैज़-ए-जलील ख़लील से पूछोआग में बाग़ खिलाते ये हैं

उन के नाम के सदक़े जिस सेजीते हम हैं, जिलाते ये हैं

उस की बख़्शिश इन का सदक़ादेता वो है दिलाते ये हैं

इन का हुक्म जहाँ में नाफ़िज़क़ब्ज़ा कुल पे रखाते ये हैं

क़ादिर-ए-कुल के नाइब-ए-अकबरकुन का रंग दिखाते ये हैं

इन के हाथ में हर कुँजी हैमालिक-ए-कुल कहलाते ये हैं

इन्ना आ'तै़नाकल-कौसरसारी कसरत पाते ये हैं

रब है मो'ती ये हैं क़ासिमरिज़्क़ उस का है खिलाते ये हैं

मातम-घर में एक नज़र मेंशादी शादी रचाते ये हैं

अपनी बनी हम आप बिगाड़ेंकौन बनाए बनाते ये हैं

लाखों बलाएँ करोड़ों दुश्मनकौन बचाए बचाते ये हैं

बंदे करते हैं काम ग़ज़ब केमुज़्दा रिज़ा का सुनाते ये हैं

नज़'-ए-रूह में आसानी देंकलिमा याद दिलाते ये हैं

मरक़द में बंदों को थपक करमीठी नींद सुलाते ये हैं

बाप जहाँ बेटे से भागेलुत्फ़ वहाँ फ़रमाते ये हैं

माँ जब इकलौते को छोड़ेआ आ कह के बुलाते ये हैं

संखों बेकस रोने वालेकौन चुपाए चुपाते ये हैं

ख़ुद सज्दे में गिर कर अपनीगिरती उम्मत उठाते ये हैं

नंगों बे-नंगों का पर्दादामन ढक के छुपाते ये हैं

अपने भरम से हम हलकों कापल्ला भारी बनाते ये हैं

ठंडा ठंडा मीठा मीठापीते हम हैं पिलाते ये हैं

सल्लिम सल्लिम की ढारस सेपुल पर हम को चलाते ये हैं

जिस को कोई न खुलवा सकतावो ज़ंजीर हिलाते ये हैं

जिन के छप्पर तक नहीं उन केमोती-महल सजवाते ये हैं

टोपी जिन के न जूती, उन कोताज-ओ-बुराक़ दिलाते ये हैं

कह दो रज़ा से ख़ुश हो ख़ुश रहमुज़्दा रिज़ा का सुनाते ये हैं

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