नात लिरिक्स

Roza-e-Muhammad Par Ek Din Main Jaunga

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

नात ख़्वान: हाफ़िज़ हस्सान अंज़रशायर: फ़िज़ा फ़ानियाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मौला ! तयबा बुला ले, मौला ! तयबा बुला ले

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगारौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगा

तिश्नगी मेरे लब की हद से बढ़ रही है अबपी के आब-ए-ज़मज़म मैं तिश्नगी बुझाऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

इक बार मदीने में हो जाए मेरा जानाफिर और न कुछ माँगे सरकार से दीवाना

दीद को मदीना की दिल मेरा तड़पता हैमुज़्तरिब निगाहों को का'बा भी दिखाऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगा

ग़म ने मुझ को घेरा है, दिल उदास रहता हैथाम कर मैं जाली को हाल-ए-दिल सुनाऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगा

'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का हो हर घड़ी जुनूँ तारीइन के ही वसीले से रब को मैं मनाऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगा

है दु'आ मेरी रब से आए मौत तयबा मेंजाऊँगा मदीने में, लौट कर न आऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

इक बार मदीने में हो जाए मेरा जानाफिर और न कुछ माँगे सरकार से दीवाना

आरज़ू फ़िज़ा की है, सहन-ए-शहर-ए-तयबा मेंबज़्म-ए-मुस्तफ़ा हो, मैं ना'त ये सुनाऊँगा

रौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

अपने रब से रोज़-ओ-शब आस ये लगाऊँगारौज़ा-ए-मुहम्मद पर एक दिन मैं जाऊँगा

मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना !

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