नात लिरिक्स

Aye Shauq-e-Safar Tu Chal Is Baar Madine Mein

ऐ शौक़-ए-सफ़र तू चल इस बार मदीने में

नात ख़्वान: हाफ़िज़ हस्सान अंज़रशायर: बिन्त-ए-इरफ़ान फ़ाज़लीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना !

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

चूम आऊँ निगाहों से उस गुंबद-ए-ख़ज़रा कोदिन-रात बरसते हैं अनवार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

अब काटे नहीं कटती फ़ुर्क़त की सियाह रातेंहो जाऊँ मैं अब जा कर सरशार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

चालीस नमाज़ों का पा कर के सवाब इक दिनहो जाएँगे जन्नत के हक़दार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

तयबा को जो जाऊँ मैं, बस जाऊँ वहीं जा करऐ काश ! बने मेरा घर-बार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

बरसों की तमन्ना है पूरी हो, मेरे या रब !रमज़ान में हासिल हों इफ़्तार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

इस वास्ते है 'अज़मत उस शहर की शहरों पररहते हैं दो 'आलम के सरदार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

कैसी वो घड़ी होगी ? कैसा वो समाँ होगा ?हस्सान सुनाए जब अश'आर मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

अब फ़ाज़ली जब जाए अल्लाह के करम से फिरसब कुछ ही लुटा आए संसार मदीने में

ऐ शौक़-ए-सफ़र ! तू चल इस बार मदीने मेंहो जाए शह-ए-दीं का दीदार मदीने में

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