नात लिरिक्स

Diyar Mere Habib Ka Hai Na Chal Yahan Sar Utha Utha Kar

दियार मेरे हबीब का है न चल यहाँ सर उठा उठा कर

नात ख़्वान: हाफ़िज़ हस्सान अंज़रशायर: फ़रहत हुसैनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दर-ए-नबी पर जो हाज़िरी दूँ, सलाम लाखों मैं उन पे भेजूँबड़े अदब से मैं ना'त-ए-अक़दस सुनाऊँ सर को झुका झुका कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

सना-ए-सरवर अदा हो कैसे, हर एक लम्हा इसी में गुज़रेब-फ़ज़्ल-ए-रब्बी जो शे'र उतरे, तो ख़ुश हों उन को सुना सुना कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

'अज़ीज़-तर है नबी की सीरत, है लब पे मेरे नबी की मिदहतजो ना'त मैं ने लिखी है अब तक सना की शम'एँ जला जला कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

यक़ीं है मुझ को ब-फ़ज़्ल-ए-रब्बी ज़रूर होगी वो मेरी पूरीदर-ए-नबी पर दु'आ जो माँगूँ मैं अपना दुखड़ा सुना सुना कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

ख़ुदा-ए-बरतर का फ़ज़्ल होगा ब-रोज़-ए-महशर यक़ीं है मुझ कोवो अपनी उम्मत को आब-ए-कौसर का जाम देंगे बुला बुला कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

रज़ा-ए-रब भी मिलेगी, ख़ुश-दिल ! रज़ा-ए-सरवर है तेरी मंज़िलहै शर्त इतनी नबी के हुकमों पे चलना है सर झुका झुका कर

यही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

दियार मेरे हबीब का है, न चल यहाँ सर उठा उठा करयही वो दर है जहाँ मलाइक हैं आते पलकें बिछा बिछा कर

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