नात लिरिक्स

Diyar-e-Muhammad Mein Ja Kar Kahunga | Muhammad Ke Rauze Pe Main Aa Gaya Hun

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा | मुहम्मद के रौज़े पे मैं आ गया हूँ

नात ख़्वान: हाफ़िज़ हस्सान अंज़रशायर: उज़्मा फ़हीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्लल्लाह सुब्हान-अल्लाह ! सल्लल्लाह सुब्हान-अल्लाह !सल्लल्लाह सुब्हान-अल्लाह ! सल्लल्लाह सुब्हान-अल्लाह !

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

मदीने की गलियाँ, वो दिलकश नज़ारेकबूतर जहाँ के मुझे भी पुकारेकि तुझ से भी आ'ला मुक़द्दर है मेराकबूतर को उल्फ़त दिखा कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

मुहम्मद को रब ने मुदस्सिर पुकारामुज़म्मिल पुकारा, मुतह्हिर पुकारानबी जी की मिदहत मलाइक भी करतेमैं आयत सभी को सुना कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

न कोई है अदना, न कोई है आ'लानबी का ये दर है, सरापा है तक़्वाहसब में, नसब में न तफ़रीक़ कोईमैं बातिल तसव्वुर मिटा कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

है उम्मत, नबी ! आप की हक़ से ग़ाफ़िलइफ़ादा हुआ उस से दुश्मन को हासिलहै ग़ज़ा में लाशों के मलबे, नबी जी !मैं आक़ा से नज़रें चुरा कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

ख़ुदा ने सहाबा को रिफ़'अत है बख़्शीनबी के ग़ुलामों को 'इज़्ज़त है बख़्शीसिरात-ए-मुनव्वर के हैं वो सितारेदिल-ओ-जान उन पर लुटा कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

मुहम्मद के रौज़े पे मैं आ गया हूँम'आसी से लिपटा मैं दर पर पढ़ा हूँसिफ़ारिश फ़क़ीरा की कर देना रब सेनदामत से आँसू बहा कर कहूँगा

दियार-ए-मुहम्मद में जा कर कहूँगा'अक़ीदत से सर को झुका कर कहूँगा

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