नात लिरिक्स

Rooh-e-Shabbir Wo Manzar To Bata

रूह-ए-शब्बीर वो मंज़र तो बता

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: नूर अहमद नूरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगीये तो ज़ैनब ही बता सकती हैलौट कर कैसे मदीने में वो आई होगी

कर के रौज़े की तरफ़ चेहरा ये बोले शब्बीरहम रहें या न रहें, नाना हुज़ूर !हश्र तक आप की उम्मत की भलाई होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

लाश अकबर की उठा लाए जो ख़ैमों में हुसैनशहर-बानो ही बता सकती हैकिस ग़ज़ब की वो क़यामत थी जो टूटी होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

जलते ख़ैमों में झुलसती वो सकीना मा'सूमए फ़लक ! तूने ये कैसे देखा !तुर्बत-ए-ज़हरा मदीने में दहलती होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

रख के लाशों को क़तारों में ये बोले शब्बीरतू जो राज़ी है तो हम राज़ी हैंसर-ए-तस्लीम कि तेरी यही मर्ज़ी होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

हो के तैयार चले शाह जो कर्बल की तरफ़ये सकीना को कोई जा देखेकिस तरह घोड़े की टाँगों से वो लिपटी होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

नूर को हश्र में रखना है सगों में, शब्बीर !तेरी राहों में पड़ा होगा कहींआस इक नज़र-ए-'इनायत की लगाई होगी

रूह-ए-शब्बीर ! वो मंज़र तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगी

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