नात लिरिक्स

Roo-siyaahon Par Karam, Ai Do Jahaan Ke Taajdaar

रू-सियाहों पर करम, ए दो जहाँ के ताजदार

नात ख़्वान: मदनी रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रू-सियाहों पर करम, ए दो जहाँ के ताजदार !अपने ग़म में, अपनी उल्फ़त में रुलाओ ज़ार-ज़ार

हुस्न-ए-गुलशन में सरासर है फ़रेब, ए दोस्तो !देखना है हुस्न तो देखो 'अरब के रेग-ज़ार

हम ग़रीबों को मदीने में बुला लो, या नबी !वासिता अहमद रज़ा का, दो जहाँ के ताजदार !

गर मुक़द्दर में मेरे दूरी लिखी है, या नबी !काश ! फ़ुर्क़त में तेरी रोता रहूँ मैं ज़ार ज़ार

काश ! ख़िदमत सुन्नतों की मैं सदा करता रहूँअहल-ए-सुन्नत का सदा बन के रहूँ ख़िदमत-गुज़ार

हैं 'अली मुश्किल-कुशा साया-कुनाँ सर पर मेरेला फ़ता इल्ला 'अली, ला सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार

मुस्तफ़ा वाली तेरे, 'अत्तार ! डर किस बात काकार-गर होगा न तुझ पर दुश्मनों का कोई वार

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