नात लिरिक्स

Razavi Rang Mein Rang Jao Mere Yaar

रज़वी रंग में रंग जाओ मेरे यार

नात ख़्वान: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद सलमान रज़ा फ़रीदी मिस्बाहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

वो रज़ा, प्यारे रज़ा, अच्छे रज़ा, सच्चे रज़ा, मेरे रज़ा, सब के रज़ा, जिन की सदा हक़ की सना, जिन की ज़बाँ 'इश्क़-बयाँ, जिन का क़लम हक़ का 'अलम, जिन की जबीं महर-ए-यक़ीं, जिन का जिगर बाग़-ए-हुनर, पैकर-ए-ईसार

वो दिल-ओ-जाँ से फ़िदा-ए-शह-ए-अबरार, वो मक़बूल-ए-दर-ए-अहमद-ए-मुख़्तार, वो हैं 'इश्क़-ए-रिसालत के 'अलम-दार, वो दुनिया-ए-मोहब्बत के हैं सरदार, बड़ा आ'ला है किरदार, रज़ा से है हमें प्यार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

उन का सीना शह-ए-कौनैन की उल्फ़त का चमन, जिस की महक, जिस की लहक, फ़ख़्र-ए-ज़मीं, फ़ख़्र-ए-फ़लक, जिस के शजर बर्ग-ओ-समर, ग़ुंचा-ओ-गुल या'नी कि कुल रौनक़-ए-इस्लाम

उन की तहरीर की तनवीर से ता'मीर है मीनार-ए-वफ़ा, क़स्र-ए-सना, बाब-ए-करम, शहर-ए-हिकम, 'इश्क़-ओ-मोहब्बत का जहाँ, नग़्मा-ए-आक़ा-ए-ज़माँ, सिद्क़-ओ-यक़ीं, 'अज़मत-ए-दीं, हक़ का वक़ार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

'इल्म-ओ-'इरफ़ाँ के वो इक गौहर-ए-नायाब, हिदायत के वो महताब, शहंशाह-ए-सुख़न, नय्यर-ए-फ़न, फ़ख़्र-ए-ज़मन, शाह-ए-अदब, जान-ए-क़लम, नाज़-ए-'अरब, शान-ए-'अजम, 'इश्क़-ओ-मोहब्बत के इमाम

जल्वा-ए-फ़ैज़-ए-नबी, महर-ए-'इनायात-ए-'अली, नूर-ए-दर-ए-ग़ौस-ए-जली, 'अज़्म-ए-हुसैन, 'अक्स-ए-हसन, हामी-ए-दीं, नाशिर-ए-हक़, जिन से है ता-हश्र गुलिस्तान-ए-शरी'अत में निखार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

वो गुल-ए-फ़ज़्ल-ओ-कमालात, चराग़-ए-दर-ए-बरकात, वो इक तोहफ़ा-ए-सादात, किछौछा की हैं सौग़ात, वो फ़ैज़ान-ए-दर-ए-ख़्वाजा-ए-अजमेर, 'अता-ए-शह-ए-हजवेर

उन पे मुर्शिद भी करें नाज़, ये है कितनी बड़ी शान, ये कितना बड़ा ए'ज़ाज़, कि जिस से हुए अरबाब-ए-हिदायत में वो मुमताज़, ये है 'इश्क़ की मे'राज, मिला उन को शरी'अत का तरीक़त का हसीं ताज, बने दीन के मे'मार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

ग़ैरत-ए-'इश्क़-ए-रिसालत के वो इक ख़ंजर-ए-ख़ूँ-ख़्वार, वो इक बर्क़-ए-शरर-बार, हर इक नज्दी वहाबी के लिए शो'ला-फ़िशाँ, आफ़त-ए-जाँ, क़हर-ए-ख़ुदा, ज़र्ब-ए-'अज़ीम

बन के वो तेग़-ए-'उमर, कोह-ए-यक़ीं, ग़ैरत-ए-दीं, आगे बढ़े, हो के निडर, ख़त्म किए नज्द के शर, जिस की धमक, जिस का असर, आज भी है दाफ़े'-ए-अशरार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

'इल्म-ए-बातिन हो कि ज़ाहिर, वो थे हर एक में माहिर, वो मुजद्दिद, वो वली हैं, वो कमालों के धनी हैं, मैं बयाँ कैसे करूँ उन के सब औसाफ़

ज़ोहद-ओ-तक़्वा के वो नायाब गुलिस्तान, वो हैं ना'त के हस्सान, वो ऐवान-ए-फ़क़ाहत के हैं नो'मान, उन्हों ने जो क़लम अपना चलाया, तो दलाइल का हसीं दरिया बहाया, वो हैं फ़ैज़-ए-शह-ए-कौनैन के शहकार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

जान-ए-रहमत पे सलाम ऐसा है मक़बूल, कि सब अहल-ए-सुनन का बना मा'मूल, जो है 'इश्क़ से मा'मूर, ज़माने में है मशहूर, पढ़ा जाएगा दिन-रात, न कम होगी कभी धूम

उन के क़दमों के निशाँ, फ़ैज़-रसाँ, मख़्ज़न-ए-फ़न, 'इल्मी चमन, मस्लक-ए-हक़, मशरब-ए-हक़, राह-ए-जिनाँ, बाग़-ए-अमाँ, होगा सदा ज़िक्र-ए-रज़ा, विर्द-ए-ज़बाँ, चारों तरफ़, हश्र तलक, लैल-ओ-नहार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

किश्वर-ए-'इल्म के बे-मिस्ल शहंशाह के दरबार-ए-गुहरबार में, गुल्हा-ए-सुख़न, हदिया-ए-फ़न, तोहफ़ा-ए-ईसार-ओ-वफ़ा, गौहर-ए-तौसीफ़-ओ-सना, ले के फ़रीदी है खड़ा, बहर-ए-क़ुबूल

काश ! वो कर दें ज़रा चश्म-ए-'अता, मुझ को मिलें ला'ल-ए-करम, जिन से भरे दामन-ए-फ़न, जेब-ए-क़लम, जिन से चमक जाए, दमक जाए मेरा ख़ाना-ए-अफ़्कार

रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !रज़वी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

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