नात लिरिक्स

Raunaq-e-Arz-o-Sama Kuchh Aur Hai

रौनक़-ए-अर्ज़-ओ-समा कुछ और है

नात ख़्वान: मुबारक हुसैन मुबारकशायर: मुबारक हुसैन मुबारकउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रौनक़-ए-अर्ज़-ओ-समा कुछ और हैशहर-ए-तयबा की हवा कुछ और है

चाँद को वो जोड़ते हैं तोड़ करमो'जिज़े पे मो'जिज़ा कुछ और है

लन-तरानी से नफ़ी ज़ाहिर हुईउदनु-मिन्नी की सदा कुछ और है

सैकड़ों जंगें हुईं इस्लाम मेंकर्बला का वाक़ि'आ कुछ और है

फेंक के ख़ंजर 'उमर कहने लगेअब हमारा फ़ैसला कुछ और है

बाप के एहसान पर कुछ शक नहींहाँ मगर माँ की दु'आ कुछ और है

तर्जमा कितनों ने क़ुरआँ का कियाजो रज़ा ने है किया कुछ और है

हैं, मुबारक ! सैकड़ों सिन्फ़ें मगरना'त-गोई का मज़ा कुछ और है

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