नात लिरिक्स

Hamaare 'Ishq Ka Jazba Agar Bedaar Ho Jaae

हमारे 'इश्क़ का जज़्बा अगर बेदार हो जाए

नात ख़्वान: मुबारक हुसैन मुबारकशायर: मुबारक हुसैन मुबारकउपलब्ध: हिंदी

हमारे 'इश्क़ का जज़्बा अगर बेदार हो जाएनबी के दीन का दुश्मन ज़लील-ओ-ख़्वार हो जाएक़मर क्या है ! इशारे से फ़लक दो-चार हो जाएअगर लकड़ी को छू दे मुस्तफ़ा, तलवार हो जाए

अगर दिल से फ़िदा-ए-हज़रत-ए-'उस्मान हो जातेगदा बन के भी अपने वक़्त के सुल्तान हो जातेमेरा दिल हज़रत-ए-'अय्यूब-अंसारी का घर होतामुहम्मद मुस्तफ़ा स़ल्ले 'अला मेहमान हो जाते

मदीने की हवा मुज़्दा मदीने का सुना जाएमैं तयबा जाऊँ या तयबा मेरे दिल में समा जाएइसी उम्मीद पे हर सुब्ह को सूरज निकलता है'अली की गोद में फिर मुस्तफ़ा को नींद आ जाए

ज़माने में कहाँ कोई भी बहलाने के क़ाबिल हैकहाँ कोई दिल-ए-मुज़्तर को समझाने के क़ाबिल हैजनाज़ा देख के मैंने कहा, मत क़ब्र ले जाओये मेरी माँ है, मेरे दिल में दफ़नाने के क़ाबिल है

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