नात लिरिक्स

Rasool-e-Mujtaba Kahiye, Muhammad Mustafa Kahiye

रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मुहम्मद मुस्तफ़ा कहिए

नात ख़्वान: शब्बीर अहमद मुज़फ़्फ़रपुरीशायर: माहिरूल क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मुहम्मद मुस्तफ़ा कहिएख़ुदा के बा'द बस वो हैं, फिर उस के बा'द क्या कहिए

शरी'अत का है ये इसरार ख़त्मुल-अम्बिया कहिएमोहब्बत का तकाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए

जब उन का ज़िक्र हो, दुनिया सरापा गोश हो जाएजब उन का नाम आए मरहबा सल्ले 'अला कहिए

मेरे सरकार के नक़्श-ए-क़दम शम्-'ए-हिदायत हैंये वो मंज़िल है जिस को मग़्फ़िरत का रास्ता कहिए

मुहम्मद की नुबुव्वत दाइरा है नूर-ए-वहदत काइसी को इब्तिदा कहिए, इसी को इंतिहा कहिए

ग़ुबार-ए-राह-ए-तयबा सुरमा-ए-चश्म-ए-बसीरत हैयही वो ख़ाक है जिस ख़ाक को ख़ाक-ए-शिफ़ा कहिए

मदीना याद आता है तो फिर आँसू नहीं रुकतेमेरी आँखों को, माहिर ! चश्म-ए-आब-ए-बक़ा कहिए

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