नात लिरिक्स

Main Ja Raha Hun Dar-e-Nabi Par Durood Le Kar Salam Le Kar

मैं जा रहा हूँ दर-ए-नबी पर दुरूद ले कर सलाम ले कर

नात ख़्वान: शब्बीर अहमद मुज़फ़्फ़रपुरीशायर: मुफ़्ती हफ़ीज़ुल्लाह हफ़ीज़ बस्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं जा रहा हूँ दर-ए-नबी पर, दुरूद ले कर, सलाम ले करतलाश-ए-हक़ में निकल पड़ा हूँ, ख़ुदा-ए-बरतर का नाम ले कर

निगाहें पुर-नम हैं, दिल हज़ीं है, नज़ारे पल पल मचल रहे हैंरवाँ-दवाँ हूँ हरम की जानिब मैं दर्द-ए-दिल का दवाम ले कर

कोई न पूछे कि मैं कहाँ हूँ, मैं कौन था और अब मैं क्या हूँमैं बारगाह-ए-ख़ुदा में निकला हूँ दिल बनाने का काम ले कर

झुकी झुकी हैं मेरी निगाहें, तलब की दिल में उठी हैं आहेंदयार-ए-हक़ में पहुँच रहा हूँ शिकस्ता दिल का निज़ाम ले कर

दु'आएँ करना हमारे हक़ में, मैं आप के हक़ में हूँ दु'आ-गोसुनाने निकला हूँ दिल के दुखड़े ग़म-ए-ख़वास-ओ-'अवाम ले कर

ग़िलाफ़-ए-का'बा पकड़ पकड़ कर, फ़ुग़ाँ करूँगा मैं चीख़ चीख़ करकहूँगा, या रब ! है बंदा हाज़िर उम्मीद-ए-रहमत का दाम ले कर

नहीं है नेकी की कुछ भी पूँजी, तलाश-ए-जन्नत में आ पड़ा हूँगुनाहगारी की सुब्ह ले कर, गुनाहगारी की शाम ले कर

मदीना जा कर मैं क्या कहूँगा, बहाना रौज़ा पे क्या करूँगाकमाल-ए-दा'वा-ए-'इश्क़ ले कर, दलील बस ना-तमाम ले कर

हफ़ीज़ ! देखो सँभल के जाना, दयार-ए-तयबा में जा रहे होनबी से कहना मैं आ रहा हूँ दुखी दिलों का पयाम ले कर

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