नात लिरिक्स

Nabi Ka Naam Jab Mere Labon Par Raqs Karta Hai

नबी का नाम जब मेरे लबों पर रक़्स करता है

नात ख़्वान: शब्बीर अहमद मुज़फ़्फ़रपुरीशायर: मुज़फ़्फ़र वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नबी का नाम जब मेरे लबों पर रक़्स करता हैलहू भी मेरी शिरयानों के अंदर रक़्स करता है

मेरी बेचैन आँखों में वो जब तशरीफ़ लाते हैंतसव्वुर उन के दामन से लिपट कर रक़्स करता है

वो सहराओं में भी पानी पिला देते हैं प्यासों कोकि उन की उँगलियों में भी समंदर रक़्स करता है

पड़े हैं नक़्श-ए-पा-ए-मुस्तफ़ा के हार गर्दन मेंजभी तो रूह लहराती है, पैकर रक़्स करता है

ख़याल आता है जब भी गर्मी-ए-रोज़-ए-क़ियामत काग़म-ए-'इस्याँ सर-ए-दरिया-ए-कौसर रक़्स करता है

ज़मीन-ओ-आसमाँ भी अपने क़ाबू में नहीं रहतेतड़प कर जब मुहम्मद का क़लंदर रक़्स करता है

लगी है भीड़ उस के गिर्द ये कैसी फ़रिश्तों कीये किस का नाम ले ले कर मुज़फ़्फ़र रक़्स करता है

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