नात लिरिक्स

Main Ne Jab Aap Ki Dehleez Ko Aaqa Chooma

मैं ने जब आप की दहलीज़ को आक़ा चूमा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुज़फ़्फ़र वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं ने जब आप की दहलीज़ को, आक़ा ! चूमायूँ लगा आप ने जैसे मेरा माथा चूमा

होंट फ़ारिग़ हुए पल भर को न आँखें मेरीकभी जाली, कभी रौज़ा, कभी पर्दा चूमा

आप को ख़्वाब में देखा तो मुक़द्दर जागेझूम उठा, ना'त पढ़ी, रो दिया, लिपटा, चूमा

उन के क़दमों की तरफ़ ले गए जब होंट मुझेहोंट भी नक़्श-ए-क़दम बन गए इतना चूमा

सफ़र-ए-'अर्श पे ले जाने को जिब्रील जब आएअपने काफ़ूरी लबों से तेरा तलवा चूमा

मैं बताता हूँ तुम्हें 'इश्क़-नवर्दी क्या हैएक आहट के लिए सारा मदीना चूमा

शहद सा दौड़ गया है मेरी शिरयानों मेंजब कभी पढ़ के दुरूद अपना अँगूठा चूमा

मंज़िलें रहती हैं सीने में, मुज़फ़्फ़र ! मेरेवो जिधर से भी गए मैं ने वो रस्ता चूमा

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