नात लिरिक्स

Jab Tak Jiyun Main Aaqa Koi Gham Na Paas Aaye

जब तक जियूँ मैं आक़ा कोई ग़म न पास आए

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरी इल्तिजा, या रसूलल्लाह !दिल की है सदा, या रसूलल्लाह !तेरे ज़िक्र से मेरी साँसें चलेंहोगा बेड़ा पार, या रसूलल्लाह !

जब तक जियूँ मैं, आक़ा ! कोई ग़म न पास आएजो मरूँ तो हो लहद पर तेरी रहमतों के साए

हैं ख़िज़ाँ ने डाले डेरे, मुरझा गए हैं सब गुलमेरे उजड़े बाग़ में फिर, आक़ा ! बहार आए

कभी था, न है, न होगा, कोई ग़म-गुसार ऐसाजो लहद में भी थपक कर 'उश्शाक़ को सुलाए

मेरी ज़िंदगी का मक़्सद हो, ऐ काश ! 'इश्क़-ए-अहमदमुझे मौत भी जो आए, इसी जुस्तुजू में आए

वो दिया जो बुझ गया था, वो जो खो गई थी सोज़नहुवा हर तरफ़ उजाला, जो हुज़ूर मुस्कुराए

मुझे मौत ज़िंदगी दे, मुझे ज़िंदगी मज़ा देजो किताब-ए-ज़िंदगी पर मुहर अपनी वो लगाए

चली आँधियाँ ग़मों की, गिरी बिजलियाँ दुखों कीये तेरा करम है, आक़ा ! कि क़दम न लड़खड़ाए

दर-ए-यार पर पड़ा हूँ, इस उसूल पर गिरा हूँजो गिरा हुवा हो ख़ुद ही, उसे कौन अब गिराए

जिसे मारा हो ग़मों ने, जिसे घेरा हो दुखों नेमेरा मशवरा है उस को, वो मदीना हो के आए

जिसे मारा हो ग़मों ने, जिसे घेरा हो दुखों नेमेरी इल्तिजा है, आक़ा ! उसे अपने दर बुलाएँ

कोई ग़ार-ए-सौर में यूँ ब-ज़बान-ए-हाल बोलेन हटाऊँगा अँगूठा, मेरी जान अगरचे जाए

मौला 'अली की ता'अत की वो शान, अल्लाह अल्लाहजिस के लिए वो डूबा सूरज भी लौट आए

मैं ग़ुलाम-ए-पंजतन हूँ, न समझना बे-सहारामैं हूँ ग़ौस का दीवाना, कोई हाथ तो लगाए

यही आरज़ू-दिली है, तेरी बज़्म में किसी दिनये तेरा 'उबैद आए, तुझे ना'त भी सुनाए

मेरी इल्तिजा, या रसूलल्लाह !दिल की है सदा, या रसूलल्लाह !तेरे ज़िक्र से मेरी साँसें चलेंहोगा बेड़ा पार, या रसूलल्लाह !

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