नात लिरिक्स

Rabi-un-Noor Hai Jahan Masroor Hai Tarane Hum Khushi Ke Aaj Gaayenge

रबीउन्नूर है जहाँ मसरूर है तराने हम ख़ुशी के आज गाएँगे

नात ख़्वान: सय्यिद अर्सलान शाह क़ादरीशायर: 'आसिम-उल-क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा !

सज गई हर गली, सब मकाँ सज गए'आशिक़ों की छतों पर है झंडे लगेहर तरफ़ धूम है, हर तरफ़ है ख़ुशीआज है हर तरफ़ नूर ही नूर ही

रबी'उन्नूर है, जहाँ मसरूर हैतराने हम ख़ुशी के आज गाएँगेनबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

बी हलीमा की गोदी का का पाला, आमिना का दुलारारहमत-ए-दो-जहाँ बन के आया, ले के क़ुरआन प्याराइमाम-उल-अम्बिया, हबीब-ए-किब्रियाजो दुश्मन को भी सीने से लगाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

आए सरकार आए !मेरे दिलदार आए !मेरे ग़म-ख़्वार आए !

छट गया कुफ़्र का अब अँधेरा, हर तरफ़ है उजालागिर गए मुँह के बल सारे बुत भी, आया जब नूर वालाबुतों को पूजते, जो उन को चूमतेख़ुदा के आगे वो सर अब झुकाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

चाँद भी जिन पे क़ुर्बान होगा, कलमा कंकर पढ़ेंगेहुक्म मानेगा महताब उन का, पेड़ सज्दा करेंगेकि चेहरा देख कर, फ़िदा होंगे बशरवो नाबीनों को भी बीना बनाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

अंबिया ने भी उन की विलादत के हैं मुज़्दे सुनाएउन की आमद पे जिब्रील ने भी तीन झंडे लगाएमुनाफ़िक़ जल उठे, चिढ़ें, चिढ़ते रहेंघरों पर हम मगर झंडे लगाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

एक इब्लीस को छोड़ कर के दोनों 'आलम थे शादाँमरहबा मरहबा कह रहे थे सब मलक, जिन्न-ओ-इंसांज़माना झूम उठा, मिले जब मुस्तफ़ाख़ुशी में आज हम लंगर लुटाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

उन की आमद पे रब्ब-उल-'उला ने दोनों 'आलम सजाएउन की आमद के नग़्मे, ए 'आसिम ! हूर-ओ-ग़िल्माँ ने गाएहुआ मौसम हसीं, महक उठी ज़मींकि फ़ज़्ल-ए-रब के अब अनवार छाएँगे

नबी जी आ गए, जहाँ में छा गएकि दिल ईमान से अब जगमगाएँगे

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