नात लिरिक्स

Rab Ke Mehboob Par Durood-o-Salam

रब के महबूब पर दुरूद-ओ-सलाम

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जान-ए-उस्लूब पर दुरूद-ओ-सलामसब के मतलूब पर दुरूद-ओ-सलामउस बहुत ख़ूब पर दुरूद-ओ-सलामरब के महबूब पर दुरूद-ओ-सलाम

जिस की आमद पे ये जहाँ झूमाजिस की आमद पे झुक गया का'बाजिस की आमद पे कुफ़्र थर्रायावो नबी आमिना के घर आया

वो नबी आन-ए-काएनात नबीवो नबी शान-ए-काएनात नबीवो न होता तो कुछ नहीं होतावो नबी जान-ए-काएनात नबी

करते उस की ही नौकरी हम हैंउस के सदक़े ही जन्नती हम हैंउस की मर्ज़ी ख़ुदा की मर्ज़ी हैफ़ख़्र है उस के उम्मती हम हैं

हिज्र का ग़म सता रहा है मुझेमौत का डर डरा रहा है मुझेख़्वाब ही में सही कोई कह देशहर-ए-आक़ा बुला रहा है मुझे

ना'त पढ़ते हुए चलूँ तयबामैं मचलते हुए चलूँ तयबामुझ को जामी सा 'इश्क़ मिल जाएरक़्स करते हुए चलूँ तयबा

जल्वा-ए-किब्रिया मदीना हैपढ़िए सल्ले-'अला मदीना हैकाश ! आक़ा कहें बुला के मुझेदेख कैसा मेरा मदीना है

रश्क-ए-कैफ़-ओ-सुरूर में पहुँचूँबारिश-ए-रंग-ओ-नूर में पहुँचूँबाग़-ए-'अज्वा-खजूर से हो करबारगाह-ए-हुज़ूर में पहुँचूँ

पेश सल्ले-'अला करूँगा मैंउन की चौखट पे सर धरूँगा मैंबाब-ए-जिब्रील पर खड़े हो करअपने सरकार से कहूँगा मैं

अपने शा'इर की शा'इरी तुम होअपने 'आशिक़ की 'आशिक़ी तुम होसब की आँखों की रौशनी तुम होसारे 'आलम की ज़िंदगी तुम हो

तुम हो आदम की आदमियत मेंतुम हो 'ईसा की शान-ओ-शौकत मेंतुम ही अव्वल हो सारी ख़िल्क़त मेंतुम ही आख़िर भी हो रिसालत में

हो तुम्हीं कलमा-ए-शहादत मेंकोई तुम सा नहीं है जन्नत मेंहोता जाएज़ अगर शरी'अत मेंसज्दे करता तुम्हें मोहब्बत में

बार-ए-'इस्याँ से ख़म ये सर है, हुज़ूर !जानता हूँ तुम्हें ख़बर है, हुज़ूर !हिन्द में मेरा जी नहीं लगताआरज़ू मेरी मुख़्तसर है, हुज़ूर !

आरज़ू है उठाए ना'ल-ए-करीमघर के बाहर कहीं खड़ा रहताया ग़ुलामों की जूतियों के क़रीबआख़िरी साँस तक पड़ा रहता

मैं हूँ जावेद आप ही का ग़ुलामइस ग़ुलामी में ज़िंदगी हो तमामसामने आप ही के दम निकलेमैं जनाज़ा रहूँ तो आप इमाम

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