नात लिरिक्स

Qismat Ko Jagmagane Mah-e-Siyam Aaya | Ramzan Aa Gaya Hai

क़िस्मत को जगमगाने माह-ए-सियाम आया | रमज़ान आ गया है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या शहर रमदान मरहबा !या शहर रमदान मरहबा !

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया हैरमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

रमदान करीम ! रमदान करीम !रमदान करीम ! रमदान करीम !

क़िस्मत को जगमगाने माह-ए-सियाम आयाबंदों को बख़्शवाने माह-ए-सियाम आया

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

या शहर रमदान मरहबा !या शहर रमदान मरहबा !

ऐ मोमिनो ! मुबारक दुनिया की आख़िरत कीफिर ने'मतें दिलाने माह-ए-सियाम आया

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

रमदान करीम ! रमदान करीम !रमदान करीम ! रमदान करीम !

क़ुरआन की तिलावत का ज़ौक़ 'इबादतों काइक बार फिर बढ़ाने माह-ए-सियाम आया

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

या शहर रमदान मरहबा !या शहर रमदान मरहबा !

सद-शुक्र पा रहे हैं इफ़्तार और सहर केलम्हात ये सुहाने, माह-ए-सियाम आया

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

रमदान करीम ! रमदान करीम !रमदान करीम ! रमदान करीम !

आओ, 'उबैद ! भर लें हम अपनी झोलियों कोबख़्शिश के दुर्र लुटाने माह-ए-सियाम आया

रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है

या शहर रमदान मरहबा !या शहर रमदान मरहबा !

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