नात लिरिक्स

Qadriyam Nara-e-Ya Ghaus-e-Azam MeeZanam | Ek Baar Bulaya Tha Har Baar Bulayenge

क़ादिरियम नारा-ए-या-ग़ौस-ए-आज़म मी-ज़नम | इक बार बुलाया था हर बार बुलाएँगे

नात ख़्वान: डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

ग़ुलाम-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म बेकस-ओ-मुज़्तर नमी मानदअगर मानद शब-ए-मानद शब-ए-दीगर नमी मानद

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

इक बार बुलाया था, हर बार बुलाएँगेइस साल यक़ीनन हम बग़दाद को जाएँगे

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

बचपन से मेरी माँ ने मुझ को ये सिखाया हैजब आए कोई आफ़त या ग़ौस पुकारा है

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

मेरे ग़ौस पिया पल में मुर्दों को जिलाते हैंऔर चोर को भी पल में अब्दाल बनाते हैं

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

पीरों के आप पीर हैं, या ग़ौस ! अल-मददअहल-ए-सफ़ा के मीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद

सदक़ा रसूल-ए-पाक का झोली में डाल दोहम क़ादरी फ़क़ीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद

तीर-ए-नज़र से फेर दो सारे अलम के तीरक्या ये अलम के तीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद

दिल की सुनाए अख़्तर दिल की ज़बान मेंकहते ये बहते नीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

करते हैं जिन्न-ओ-बशर हर वक़्त चर्चा ग़ौस काबज रहा है चार-सू 'आलम में डंका ग़ौस का

नार-ए-दोज़ख़ से बचाएगा सहारा ग़ौस काले चलेगा ख़ुल्द में अदना इशारा ग़ौस का

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

ख़ुदा के फ़ज़्ल से हम पर है साया ग़ौस-ए-आ'ज़म काहमें दोनों जहाँ में है सहारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

हमारी लाज किस के हाथ है ! बग़दाद वाले केमुसीबत टाल देना काम किस का ! ग़ौस-ए-आ'ज़म का

गए इक वक़्त में सत्तर मुरीदों के यहाँ हज़रतसमझ में आ नहीं सकता मु'अम्मा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

निदा देगा मुनादी हश्र में यूँ क़ादरियों कोकिधर हैं क़ादरी ? कर लें नज़ारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

सदा-ए-सूर सुन कर क़ब्र से उठते ही पूछुँगाकि बतलाओ किधर है आस्ताना ग़ौस-ए-आ'ज़म का

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

मैं क़ादरी हूँ, शुक्र है रब्ब-ए-क़दीर कादामन है मेरे हाथ में पीरान-ए-पीर का

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

तेरे जद की है बारहवीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !मिली है तुझे ग्यारहवीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

कोई उन के रुत्बे को क्या जानता हैमुहम्मद के हैं जा-नशीं ग़ौस-ए-आ'ज़म

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमक़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नम

मेरे ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी ! मेरे ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी !या ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी !

क़ादिरियम ना'रा-ए-या-ग़ौस-ए-आ'ज़म मी-ज़नमदम ज़ शैख़ अहमद रज़ा ख़ाँ क़ुत्ब-ए-'आलम मी-ज़नम

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