नात लिरिक्स

Jo Ata-e-Mustafa Hai Aur Raza-e-Kibriya, Wo Imaam Ahmad Raza Hai Wo Imaam Ahmad Raza

जो अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रिया, वो इमाम अहमद रज़ा है वो इमाम अहमद रज़ा

नात ख़्वान: डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !

जो क़ुद्सी हश्र में पूछेंगे मुझ से किस का पैरो थाकहूँगा कर के सर ऊँचा इमाम अहमद रज़ा खाँ का

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ादीन का जो पासबाँ है और हमारा रहनुमावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

सुन्नियों का पेशवा ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !'इल्म-ओ-फ़न का बादशा ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !है मदीने की ज़िया ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !ग़ौस-ए-'आज़म की 'अता ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जिस का सीना है अमीं मौला 'अली के 'इल्म काअहल-ए-सुन्नत को मिली जिस से फ़तावा-रज़वियाजिस का हम पर बिल-यक़ीं एहसान है बे-इंतिहावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो ज़माने का यक़ीनन आ'ला हज़रत बन गयाफ़िक़्ह में जो बू-हनीफ़ा भी था अपने वक़्त काजो है सरकार-ए-दो-'आलम का यक़ीनन मो'जिज़ावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

मश'अल-ए-राह-ए-तरीक़त जिस की हर तहरीर हैदुश्मनों के वास्ते जिस का क़लम शमशीर हैजिस की हैबत से अभी तक नज्द में है ज़लज़लावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

अहल-ए-'इल्म-ओ-फ़िक़्ह में जिस की अलग पहचान हैजिस की 'इल्मी शान-ओ-शौक़त पर जहाँ क़ुर्बान हैजिस के फ़न की चार-सू फ़ैली ज़माने में ज़ियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जिस की हैं सारी अदाएँ सुन्नत-ए-ख़ैरुल-बशररात-दिन ज़िक्र-ए-नबी में ही किए जिस ने बसरहो गया फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से जो हबीब-ए-मुस्तफ़ावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

'इल्म-ओ-फ़ैज़ान-ए-रज़ा की जो निरी तस्वीर हैख़ुद वो सर से पा तलक तनवीर ही तनवीर हैगुलशन-ए-अहमद-रज़ा का फूल वो अख़्तर रज़ावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

पैकर-ए-हक़-ओ-सदाक़त जिस की है ज़ात-ए-मुबींक़ल्ब पर जिस के हुआ ता'मीर 'इश्क़-ए-शाह-ए-दींहै दिल-ओ-जाँ से ये तफ़्सीर-ए-रज़ा जिस पर फ़िदावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

जो 'अता-ए-मुस्तफ़ा है और रज़ा-ए-किब्रियावो इमाम अहमद रज़ा है, वो इमाम अहमद रज़ा

सुन्नियों का पेशवा ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !'इल्म-ओ-फ़न का बादशा ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !है मदीने की ज़िया ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !ग़ौस-ए-'आज़म की 'अता ! मेरा रज़ा, मेरा रज़ा !

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