नात लिरिक्स

Ai Aal-e-Nabi. Khwaja ! Aulaad-e-Ali, Khwaja ! (Bigdi Ke Banaane Mein Kyun Der Lagi, Khwaja !)

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा ! (बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !)

नात ख़्वान: डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीउपलब्ध: हिंदी

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख़्वाजा !हाथों में तुम्हारे हो मन, शाह-ए-वली ! ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

दिन-रात बनाते हो खोटी को खरी, ख़्वाजा !चौखट पे तेरी किस की झोली न भरी, ख़्वाजा !बरगश्ता नसीबों की तक़दीर फिरी, ख़्वाजा !आँखें मेरी अब तक है चौखट पे धरी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख़्वाजा !हाथों में तुम्हारे हो मन, शाह-ए-वली ! ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

भर लेते हैं उस दर पर झोली को सभी, ख़्वाजा !महरूम नहीं जाता कोई भी कभी, ख़्वाजा !ले लूँगा मैं मुँह-माँगा चौखट पे अभी, ख़्वाजा !उट्ठेगा तो उट्ठेगा सर मेरा जभी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख़्वाजा !हाथों में तुम्हारे हो मन, शाह-ए-वली ! ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

क्या शान तुम्हारी है, 'अल्लाहु-ग़नी' ! ख़्वाजा !दुनिया के धनी, ख़्वाजा ! उक़्बा के धनी, ख़्वाजा !ज़र्रे को बनाते हो ला'ल-ए-यमनी, ख़्वाजा !क्या बात है जो अब तक मेरी न बनी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख़्वाजा !हाथों में तुम्हारे हो मन, शाह-ए-वली ! ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

किस शान से महफ़िल की रौनक़ हो सजी, ख़्वाजा !ना-शाद की जाती है दिन-रात ग़मी, ख़्वाजा !देखो ज़रा सय्यिद की आँखों की नमी, ख़्वाजा !किस चीज़ की आख़िर है इस दर पे कमी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

ए आल-ए-नबी, ख़्वाजा ! औलाद-ए-अली, ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख़्वाजा !हाथों में तुम्हारे हो मन, शाह-ए-वली ! ख़्वाजा !हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !बिगड़ी के बनाने में क्यूँ देर लगी, ख़्वाजा !

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