नात लिरिक्स

Pul Se Utaro Rah Guzar Ko Khabar Na Ho

पुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न हो

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

पुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न होजिब्रील पर बिछाएँ तो पर को ख़बर न हो

काँटा मेरे जिगर से ग़म-ए-रोज़गार कायूँ खींच लीजिए कि जिगर को ख़बर न हो

फ़रियाद उम्मती जो करे हाल-ए-ज़ार मेंमुमकिन नहीं कि ख़ैर-ए-बशर को ख़बर न हो

कहती थी ये बुराक़ से उस की सुबुक-रवीयूँ जाइये कि गर्द-ए-सफ़र को ख़बर न हो

फ़रमाते हैं ये दोनों हैं सरदार-ए-दो-जहाँऐ मुर्तज़ा ! 'अतीक़-ओ-'उमर को ख़बर न हो

ऐसा गुमा दे उन की विला में ख़ुदा हमेंढूँढा करे पर अपनी ख़बर को ख़बर न हो

आ दिल ! हरम को रोकने वालों से छुप के आजयूँ उठ चलें कि पहलू-ओ-बर को ख़बर न हो

तैर-ए-हरम हैं ये कहीं रिश्ता बपा न होंयूँ देखिए कि तार-ए-नज़र को ख़बर न हो

ऐ ख़ार-ए-तयबा ! देख कि दामन न भीग जाएयूँ दिल में आ कि दीदा-ए-तर को ख़बर न हो

ऐ शौक़-ए-दिल ! ये सज्दा गर उन को रवा नहींअच्छा ! वो सज्दा कीजे कि सर को ख़बर न हो

उन के सिवा, रज़ा ! कोई हामी नहीं जहाँगुज़रा करे पिसर पे पिदर को ख़बर न हो

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