नात लिरिक्स

Pahunchun Dar-e-Sarkar Pe Chaha To Yahi Hai

पहुँचूँ दर-ए-सरकार पे चाहा तो यही है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: आसी करनालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

पहुँचूँ दर-ए-सरकार पे चाहा तो यही हैआगे मेरी तक़दीर, तमन्ना तो यही है

ये उन की रिज़ा है, मुझे भेजें, मुझे रोकेंवापस मैं नहीं आऊँगा, सोचा तो यही है

हैं गुंबद-ए-ख़ज़रा के सिवा और भी जल्वेआँखों के लिए ख़ास नज़ारा तो यही है

इज़्हार-ए-ग़म-ए-हिज्र की क्या शक्ल निकालूँरोने की भी ताक़त नहीं, रोना तो यही है

याद उन की रहे दिल में, जमाल उन का नज़र मेंनाम उन का ज़बाँ पर रहे, अच्छा तो यही है

इक ख़ास महक आने लगी मौज-ए-हवा मेंआसार बताते हैं, मदीना तो यही है

हर साँस से आती है सदा सल्ले-'अला कीहम लाख जिएँ, अस्ल में जीना तो यही है

वो मंज़िल-ए-मक़्सूद भी अल्लाह दिखाएअनवार बता देते हैं रस्ता तो यही है

तयबा में हूँ, सब कुछ मेरे दामन में है, 'आसी !दुनिया का करूँ क्या ? मेरी दुनिया तो यही है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।