नात लिरिक्स

Noor-e-Mehr-o-Mah Na Arz-o-Gagan Reh Jayaga | Koi Gul Baqi Rahega Na Chaman Reh Jayega With Tazmeen

नूर-ए-मेहर-ओ-माह न अर्ज़-ओ-गगन रह जाएगा | कोई गुल बाक़ी रहेगा न चमन रह जाएगा तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर-ए-मेहर-ओ-माह न अर्ज़-ओ-गगन रह जाएगापर्बत-ओ-सहरा न बहर-ओ-अंजुमन रह जाएगान 'अनादिल ही न हुस्न-ए-गुल-बदन रह जाएगाकोई गुल बाक़ी रहेगा न चमन रह जाएगापर रसूलुल्लाह का दीन-ए-हसन रह जाएगा

मिट गए दारा, सिकंदर और क़ैसर चल बसान कोई बाक़ी रहेगा, न कोई बाक़ी रहाचंद लम्हे जी लो फिर हो जाओगे तुम भी फ़नाहम-सफ़ीरो बाग़ में है कोई दम का चहचहाबुलबुलें उड़ जाएँगी, सूना चमन रह जाएगा

मिल्ल्त-ए-बैज़ा की जानिब गर तेरा रुजहाँ न होये तो मुमकिन ही नहीं कि फिर तेरा नुक़साँ न होबुल-हवस ! दुनिया के सीम-ओ-ज़र पे यूँ शादाँ न होअतलस-ओ-कमख़्वाब की पोशाक पर नाज़ाँ न होइस तन-ए-बे-जान पर ख़ाकी कफ़न रह जाएगा

चश्म-ए-इंसाँ पर है धोका दहर की रा'नाइयाँबिल-यक़ीं ज़ेर-ए-ख़िज़ाँ आएगा हुस्न-ए-गुल्सिताँनक़्श कर लो तख़्ती-ए-दिल पर, ऐ मीर-ए-कारवाँ !नाम-ए-शाहान-ए-जहाँ मिट जाएँगे लेकिन यहाँहश्र तक नाम-ओ-निशान-ए-पंजतन रह जाएगा

क़ल्ब में आने न पाए हसरत-ए-नाम-ओ-नुमूदता-दम-ए-आख़िर रहे पेश-ए-नज़र रब के हुदूदलौ लगा कर गुंबद-ए-ख़ज़रा से, ऐ 'अब्दुल वदूद !जो पढ़ेगा साहिब-ए-लौलाक के ऊपर दुरूदआग से महफ़ूज़ उस का तन-बदन रह जाएगा

कुछ न कुछ रह जाएगी हर शख़्स के  दिल में ललकख़त्म हो जाएगी लेकिन हुस्न-ए-ज़ुल्मत की नमकबुलबुल-ए-अय्यूब भी चहकेगी आख़िर कब तलक ?सब फ़ना हो जाएँगे, काफ़ी ! व लेकिन हश्र तकना'त-ए-हज़रत का ज़ुबानों पर सुख़न रह जाएगा

कलाम:किफ़ायत अली काफ़ी मुरादाबादी

तज़मीन:मौलाना अय्यूब रज़ा अमजदी

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