नात लिरिक्स

Noor-e-Haq Jalwa-numa Tha Mujhe Maloom Na Tha

नूर-ए-हक़ जल्वा-नुमा था मुझे मालूम न था

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर-ए-हक़ जल्वा-नुमा था, मुझे मा'लूम न थाशक्ल-ए-इंसाँ में छुपा था, मुझे मा'लूम न था

बारहा जिस ने कहा था अना बशर उस नेमर्रआनी भी कहा था, मुझे मा'लूम न था

बकरियाँ जिस ने चराई थीं, हलीमा ! तेरी'अर्श पर वो ही गया था, मुझे मा'लूम न था

जिस ने उम्मत के लिए रो के गुज़ारीं रातेंवो ही महबूब-ए-ख़ुदा था, मुझे मा'लूम न था

चाँद इशारे से फटा, हुक्म से सूरज लौटामज़हर-ए-ज़ात-ए-ख़ुदा था, मुझे मा'लूम न था

देखा जब क़ब्र में उस पर्दा-नशीं को तो खुलादिल-ए-सालिक में रहा था, मुझे मा'लूम न था

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