नात लिरिक्स

Nazara Ho Darbar Ka Ghaus-e-Azam

नज़ारा हो दरबार का ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: आरिफ़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़ारा हो दरबार का, ग़ौस-ए-आ'ज़म !दिखा नीला गुंबद दिखा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मुझे जाम-ए-उल्फ़त पिला, ग़ौस-ए-आ'ज़म !रहूँ मस्त-ओ-बेख़ुद सदा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

करम कीजिए फिर मैं बग़दाद आऊँमेरे पीर का वासिता, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मुझे अपनी चौखट का कुत्ता बना लोहमेशा रहूँ बा-वफ़ा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरे आस्ताँ का हूँ मँगता, गुज़ाराहै टुकड़ों पे तेरे मेरा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

गुनाहों का बार अपने सर पर उठा करफिरूँ कब तलक जा-ब-जा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

'इलाज आख़िर ऐ मुर्शिदी कब करेंगे !गुनाहों के बीमार का, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

गुनहगार हूँ गर 'अज़ाबों ने घेरातो होगा मेरा हाए क्या, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

नज़र, मुर्शिदी ! तेरी जानिब लगी है'अज़ाबों से लेना बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जहाँ में जियूँ सुन्नतों के मुताबिक़मदीने में हो ख़ातिमा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

हो 'अत्तार की बे-सबब बख़्शिश, आक़ा !ये फ़रमाएँ हक़ से दु'आ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

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