नात लिरिक्स

Nawasa Yaad Aata Hai To Aankhen Bheeg Jati Hai

नवासा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नवासा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैंवो नाना याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

वो गलियाँ और वो मस्जिद जहाँ शब्बीर रहते थेमदीना याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

मज़ार-ए-सरवर-ए-'आलम से वो किस दिल से बिछड़े थेबिछड़ना याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

हज़ारों ख़त जहाँ से आल-ए-सरवर के लिए आएवो कूफ़ा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

जिसे सुनते ही हुर्र शब्बीर के क़दमों में आए थेवो ख़ुत्बा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

गले पर तीर जिस के हुरमला ज़ालिम ने मारा थावो बच्चा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

उठाते ही जिसे शब्बीर के सब बाल पक जाएँवो लाशा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

उधर 'अब्बास के बाज़ू, इधर नन्ही सकीना कातड़पना याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

बहत्तर ज़ख़्म, तीर-ओ-ख़ंजर-ओ-तलवार हर जानिबवो सज्दा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

बदन पर जिस जगह शब्बीर के घोड़े थे दौड़ाएवो सहरा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

बहत्तर ज़ख़्म, लाखों ग़म, बहत्तर घंटो का रोज़ावो रोज़ा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

उठा कर जिस पे लाशे आप लाए अपने ख़ैमे तकवो काँधा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

तमाचे मारना, ख़ैमे जलाना, करना बे-पर्दाये सारा याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

सिनाँ की नोक पर, जावेद ! पढ़ना आयत-ए-क़ुरआँवो पढ़ना याद आता है तो आँखें भीग जाती हैं

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