नात लिरिक्स

Nawasa Hun Payambar Ka Mujhe Shabbir Kehte Hain

नवासा हूँ पयम्बर का मुझे शब्बीर कहते हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नवासा हूँ पयम्बर का, मुझे शब्बीर कहते हैंमेरी माँ फ़ातिमा ज़हरा, मुझे शब्बीर कहते हैं

वो घर जिस में इजाज़त ले के आते बुलबुल-ए-सिदराउसी घर का हूँ परवरदा, मुझे शब्बीर कहते हैं

हसन मेरे बड़े भाई तो ज़ैनब हैं बहन मेरीमेरे बाबा 'अली मौला, मुझे शब्बीर कहते हैं

चचा हैं मेरे वालिद के जनाब-ए-सय्यिदुश्शुहदाभतीजा हूँ मैं जा'फ़र का, मुझे शब्बीर कहते हैं

मोहब्बत मुझ से जो करता है उस को जाम कौसर कापिलाएँगे मेरे नाना, मुझे शब्बीर कहते हैं

नबी नाना, 'अली बाबा, हसन भाई तो माँ ज़हराहै किस का ख़ानदाँ ऐसा, मुझे शब्बीर कहते हैं

यज़ीदी फ़ौजिओ ! सुन लो मैं तन्हा सब पे भारी हूँ'अली हैदर का हूँ बेटा, मुझे शब्बीर कहते हैं

मुझे मजबूर मत समझो, न ता'ना प्यास का तुम दोमेरी ठोकर में है दरिया, मुझे शब्बीर कहते हैं

रसूलल्लाह को महशर में कैसे मुँह दिखाओगेगला तुम काट कर मेरा, मुझे शब्बीर कहते हैं

यहाँ आया हूँ मैं वा'दा निभाने अपने बचपन काहूँ वा'दे का बहुत पक्का, मुझे शब्बीर कहते हैं

कटाना सर, लुटाना घर गवारा है मुझे लेकिननहीं मैं हाथ दे सकता, मुझे शब्बीर कहते हैं

सुनाओ मनक़बत, क़ासिम ! कि जिस का पहला मिस्रा' हैनवासा हूँ पयम्बर का, मुझे शब्बीर कहते हैं

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