नात लिरिक्स

Naseeb Par Hain Wo Aaj Naazaan Jinhein Sharaf Haj Ka Mil Raha Hai | Labbaik Allahumma Labbaik

नसीब पर हैं वो आज नाज़ाँ जिन्हें शरफ़ हज का मिल रहा है | लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: उबैद रज़ा (ओवैस रज़ा क़ादरी)उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा तेरा हाफ़िज़-ओ-निगहबान, ओ राह-ए-बतहा के जाने वाले !नवीद-सद-इंबिसात बन कर पयाम-ए-दारुस्सलाम आया

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

नसीब पर हैं वो आज नाज़ाँ, जिन्हें शरफ़ हज का मिल रहा हैमिना की जानिब रवाँ-दवाँ हैं, लबों पे लब्बैक की सदा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

ब-चश्म-ए-नम गुम कोई दु'आ में, तो कोई मसरूफ़ है सना मेंख़ुदा के मेहमान हैं मिना में, 'अजीब कैफ़-ओ-सुरूर सा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

क़ुबूल क्यूँ न हों अब दु'आएँ, मिली मुक़द्दर से ये फ़ज़ाएँमु'आफ़ उस की हैं सब ख़ताएँ, जो आज 'अरफ़ात में खड़ा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

वुक़ूफ़-ए-'अर्फ़ा से बन के कुंदन, चले हैं मुज़्दलिफ़ा हाजी हज्जनमहक रहा है दिलों का गुलशन, ख़ुशी से चेहरा दमक रहा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

अनोखी बस्ती, 'अजब ज़मीं है, कि सोज़ ऐसा कहीं नहीं हैये किस क़दर आज शब हसीं है, करम ख़ुदा का यहाँ बड़ा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

मगन कोई ढूँडने में संग है, रमी की दिल में बड़ी उमंग हैथकन से चूर आज अंग अंग है, मगर थकन में भी इक मज़ा है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

'उबैद ! अपनी कहाँ ये औक़ात कि ले के जाते यहाँ की बरकातनबी के सदक़े दु'आ का दामन सभी मुरादों से भर गया है

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक ला शरीक लक लब्बैकइन्नल-हम्द व-न्नि'अमत लक वल्-मुल्कला शरीक लक

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।