नात लिरिक्स

Nabi Ne Dar Pe Bulaya Bahut Sukoon Mein Hoon

नबी ने दर पे बुलाया बहुत सुकून में हूँ

नात ख़्वान: राओ अली हसनैनशायर: जुनैद क़ासमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीना मदीना ! मदीना मदीना !

चमक रहे हैं सितारे, 'उरूज पर क़िस्मतनज़र के सामने उन का दयार जो आया

नबी ने दर पे बुलाया, बहुत सुकून में हूँमेरा नसीब जगाया, बहुत सुकून में हूँ

मदीने का सफ़र है और मैं नम-दीदा नम-दीदाजबीं अफ़सुर्दा अफ़सुर्दा, क़दम लग़्ज़ीदा लग़्ज़ीदा

चला हूँ एक मुजरिम की तरह मैं जानिब-ए-तयबानज़र शर्मिंदा शर्मिंदा, बदन लर्ज़ीदा लर्ज़ीदा

उदासियों में गुज़रती थी ज़िंदगी पहलेउदासियों को मिटाया, बहुत सुकून में हूँ

नबी ने दर पे बुलाया, बहुत सुकून में हूँ

मदीने आने से पहले तो बे-क़रारी थीमदीने आया तो पाया, बहुत सुकून में हूँ

नबी ने दर पे बुलाया, बहुत सुकून में हूँ

किसी ने पूछा कि किस हाल में हो ? कैसे हो ?तो हाल दिल ने सुनाया, बहुत सुकून में हूँ

नबी ने दर पे बुलाया, बहुत सुकून में हूँ

जुनैद-ए-क़ासमी ! देखा जो रौज़ा-ए-अनवरक़रार रूह को आया, बहुत सुकून में हूँ

नबी ने दर पे बुलाया, बहुत सुकून में हूँ

मदीना मदीना ! मदीना मदीना !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।