नात लिरिक्स

Nabi Ke Roze Pe Jane Walo Mera Bhi Un Ko Salam Kehna

नबी के रौज़े पे जाने वालो मेरा भी उन को सलाम कहना

नात ख़्वान: सुल्तान अतीक़ रहमानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

नबी के रौज़े पे जाने वालो ! मेरा भी उन को सलाम कहनामिलो तो कहना कि कब मिलोगे ? तड़प रहा है ग़ुलाम कहना

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

उन्हें ये कहना कि क़ाफ़िले से मैं चलते चलते बिछड़ गया हूँबुला लो मुझ को भी पास अपने, लगा लो मुझ को भी सीने कहना

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

कदी ते मैं वी मदीने जा के दुरूद आखाँ सलाम आखाँकि दिल बिछा के, नज़र झुका के दुरूद आखाँ सलाम आखाँ

ये राह-ए-हक़ है सँभल के चलना, यहाँ है मंज़िल क़दम क़दम परपहुँचना दर पर तो कहना, आक़ा ! सलाम लीजे, ग़ुलाम आया

मेरी ये हालत उन्हें बताना, ग़मों के क़िस्से उन्हें सुनानाये बारगाह-ए-नबी में जा कर ख़ुदा-रा मेरा पयाम कहना

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

ये कहना, आक़ा ! बहुत से 'आशिक़ तड़पते से छोड़ आया हूँ मैंबुलावे के मुंतज़िर थे लेकिन न सुब्ह आया, न शाम आया

ये करना 'आजिज़ की तुम सिफ़ारिश कि सुन लो, आक़ा जी ! ये गुज़ारिशजिन्हें बुलाया गया है उन में वो लिख दें मेरा भी नाम कहना

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

नबी के रौज़े पे जाने वालो ! मेरा भी उन को सलाम कहनामिलो तो कहना कि कब मिलोगे, तड़प रहा है ग़ुलाम कहना

मदीने जा के सवालियाँ नूँ नैं दसणा पैंदा सवाल की एओ जाण दे ने दिलाँ दी बोली, पता उन्हाँ नूँ कि हाल की ए

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या रसूलल्लाह !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।