नात लिरिक्स

Nabi Ke Noor Ki Barkat Janab-e-Zainab Hain

नबी के नूर की बरकत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: सय्यिद शबाहत हुसैनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नबी के नूर की बरकत जनाब-ए-ज़ैनब हैं'अली के घर की शराफ़त जनाब-ए-ज़ैनब हैं

ख़दीजा नानी के चेहरे का 'अक्स हैं ज़ैनबऔर अपने नाना की सीरत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

हुसैन तेरे लिए रब ने उस को भेजा थाकि कर्बला की ज़रूरत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

'अली के लहजे में दुश्मन से बात करती थी'अली के ख़ुत्बे की हैबत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

वो कर्बला में नज़र आईं मुर्तज़ा की तरहयज़ीदियों पे क़यामत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

बचा के लाइ है कर्बल से अपने 'आबिद को'अली की नस्ल पे रहमत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

कि उन का ग़म ही बनेगा नजात का ज़रिया'मेरे लिए मेरी जन्नत जनाब-ए-ज़ैनब हैं

जो बख़्शवाएँगी महशर में तेरी नस्लों कोवो तेरी फूफी, शबाहत ! जनाब-ए-ज़ैनब हैं

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