नात लिरिक्स

Muzda-bad Aye Aasiyon Shafe Shah-e-Abrar Hai

मुज़्दा-बाद ऐ आसियो शाफ़े शह-ए-अबरार है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुज़्दा-बाद, ऐ 'आसियो ! शाफ़े' शह-ए-अबरार हैतहनियत, ऐ मुजरिमो ! ज़ात-ए-ख़ुदा ग़फ़्फ़ार है

'अर्श सा फ़र्श-ए-ज़मीं है, फ़र्श-ए-पा 'अर्श-ए-बरींक्या निराली तर्ज़ की नाम-ए-ख़ुदा रफ़्तार है

चाँद शक़ हो, पेड़ बोलें, जानवर सज्दे करेंबारकल्लाह मर्जा'-ए-'आलम यही सरकार है

जिन को सू-ए-आसमाँ फैला के जल थल भर दिएसदक़ा उन हाथों का, प्यारे ! हम को भी दरकार है

लब ज़ुलाल-ए-चश्मा-ए-कुन में गुंधे वक़्त-ए-ख़मीरमुर्दे ज़िंदा करना, ऐ जाँ ! तुम को क्या दुश्वार है

गोरे गोरे पाँव चमका दो ख़ुदा के वासितेनूर का तड़का हो, प्यारे ! गोर की शब तार है

तेरे ही दामन पे हर 'आसी की पड़ती है नज़रएक जान-ए-बे-ख़ता पर दो जहाँ का बार है

जोश-ए-तूफ़ाँ बहर-ए-बे-पायाँ हवा ना-साज़गारनूह के मौला करम कर ले तो बेड़ा पार है

रहमतुल्लिल-'आलमीं तेरी दुहाई दब गयाअब तो मौला बे-तरह सर पर गुनह का बार है

हैरतें हैं आईना-दार-ए-वुफ़ूर-ए-वस्फ़-ए-गुलउन के बुलबुल की ख़मोशी भी लब-ए-इज़्हार है

गूँज गूँज उट्ठे हैं नग़मात-ए-रज़ा से बोस्ताँक्यूँ न हो किस फूल की मिदहत में वा मिन्क़ार है

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